Tuesday, December 15, 2015

जयपुर ज्वैलरी की शुद्धता में चोरियां world gold council agreed Jaipur Jewellery not pure


वर्ल्ड गोल्ड काउसिंल ने माना

जयपुर ज्वैलरी की शुद्धता में चोरियां

भारत में वर्ल्ड गोल्ड काउसिंल के जनसम्पर्क प्रबन्धक सोम सुंदरम् ने भी राजस्थान के जयपुर की गोल्ड ज्वैलरी के विश्व स्तर पर घटती शुद्धता की शाख पर कहा कि भारत में 316 हॉल मार्क सेन्टर हैं जिसमें तमिलनाडू में सर्वाधिक 58 जबकि जयपुर में 11 हॉल मार्क सेन्टर हैं।
वर्ल्ड गोल्ड काउसिंल के अनुसार भारत के 4 लाख ज्वैलर्स की शाख को जयपुर की गोल्ड ज्वैलरी में शुद्धता की कमी के बाद दुनिया में ‘शक’ के घेरे में ला खड़ा किया है जबकि अगले 5 साल में भारत का ज्वैलरी एक्स्पोर्ट 8 अरब से 40 अरब डालर तक विश्व बाजार में बढ़ सकता था, लेकिन जयपुर के ज्वैलरों के शुद्धता में चोरियों के कारनामों से भारत की ज्वैलरी की प्रतिष्ठा विश्व बाजार में खत्म हो गई है।


ए.एस. सिलावट - वरिष्ठ पत्रकार एवं विश्लेषक

जयपुर। हीरे-पन्ने, माणक-मोती, रत्न जड़ित आभूषण राजा-महाराओं से लेकर मुगलों तक पहली पसंद के साथ अपनी विश्वसनीयता के लिए विश्व प्रसिद्धी हासिल कर चुका जयपुर आज भी सिंगापुर, हांगकांग, दुबई, लंदन से लेकर न्यूयॉर्क तक भारतीय ज्वैलर्स के शोरूम विदेशियों की पहली पसंद होते हैं और अन्य शोरूम में भारतीयों द्वारा भेजी ज्वैलरी पर ही पहली नज़र रुकती है। हीरे पन्ने और जवाहरात के स्टोन्स उत्पादन वाले अफ्रीकी देश भी अपने स्टोन्स को भारतीय ज्वैलरी मार्केट में बेचना पसंद करते हैं। भारतीय ज्वैलरी की दुनिया में यह प्रतिष्ठा बनाने में जयपुर के सर्राफा परिवारों की ‘पीढ़ियों’ ने आहुति दी है।। ज्वैलरी की गुणवत्ता और विश्वसनीयता बनाये रखने के लिए नकली ‘स्टोन्स’ के सौदों में करोड़ों के धोखे खाकर भी नकली माल का ज्वैलरी में उपयोग नहीं होने दिया, लेकिन आज के जयपुर में ज्वैलरी व्यवसाय में जुड़े लोगों में ‘मिलावट खोरों’ नकली और कम गुणवत्ता के स्टोन्स की ज्वैलरी को ‘असली’ बताकर बेचने वालों ने अपने पाँव जमा रखे हैं। दुर्भाग्य से ज्वैलर्स का मुखौटा ओढ़े इन मिलावटखोरों को जयपुर के प्रतिष्ठित और बड़े जौहरी परिवारों का संरक्षण भी मिल रहा है और कुछ बड़े जौहरी परिवार जयपुर जौहरियों की शाख को धूमिल कर रहे ‘मुखौटा’ ओढ़े मिलावटखोरों के साथी भी बन चुके हैं।
राजस्थान ही नहीं देश के प्रसिद्ध दैनिक अख़बार ने पिछले दिनों जयपुर ज्वैलरी के प्रतिष्ठित घरानों के फर्म के नाम सहित उनकी ज्वैलरी में ‘खोट’ की खबरें प्रकाशित की थी। सोने की ज्वैलरी में 22 कैरेट के रूपये लेकर 16 और 18 कैरेट तक के नैकलेस, चूड़ियाँ, इयररिंग, अगूठियाँ पकड़ी गई। अख़बार में छपी ख़बरों के बाद सुत्रों के हवाले से खबर आई थी कि जयपुर के बड़े धोखेबाज़ ज्वैलर्स पर राजस्थान पुलिस ने बहुत बड़ी कार्यवाही की तैयारी कर ली थी, लेकिन मिलावटखोर ज्वैलर्स को संरक्षण देने वाले ‘राजनेताओं’ ने इस पुलिस कार्यवाही को रुकवाकर जयपुर के मिलावटखोर ज्वैलर्स को भोली-भाली जनता को लूटने की खुली छूट दिलवा दी।
जयपुर के ज्वैलर्स की सौ-सौ किलो ज्वैलरी जयपुर एयरपोर्ट पर कस्टम के ईमानदार अधिकारियों ने ‘कस्टम चोरी’ के आरोप में कई बार पकड़ी, लेकिन कस्टम चोरी की ज्वैलरी और व्यापारी पर कार्यवाही की ख़बर कभी नहीं आती है। सरकार को टेक्स चोरी का ‘चूना’ लगाने वाले ज्वैलर्स का करोड़ों रूपया ‘हवाला’ को पुलिस पकड़ती है, लेकिन उसके बाद इन्कम टेक्स, डीआरआई, या अन्य कार्यवाही की भनक भी नहीं लगती है तथा अन्दर ही अन्दर ‘आर्थिक’ अपराधियों को संरक्षण देकर निरन्तर टेक्स चोरियों के लिए प्रोत्साहन मिलता रहता है और आगे भी यह स्थिती बदलने जैसी नहीं लगती है।
अब ज्वैलरी शो की सच्चाई जान लेते हैं। जयपुर में अंतर्राष्ट्रीय स्तर के दो ज्वैलरी शो हर साल होते हैं। इन दोनों शो के आयोजक एवं एसोसिएशन में कुछ चेहरे वही दिखाई देते हैं जिन पर राष्ट्रीय स्तर के दैनिक अख़बार में मिटावटी ज्वैलरी बेचने की रिपार्ट ‘हॉल मार्क’ एवं एमएमटीसी की लेबोरेट्री से जाँच करवाकर प्रकाशित की थी। ज्वैलरी शो में सरकारी खजाने को कैसे ‘चूना’ लगाते हैं पहले यह जान लेते हैं।
आने वाली ज्वैलरी चाहे दिल्ली, मुम्बई, कोलकता या चैन्नई से आती है प्राप्त जानकारी के अनुसार शो में उसे ‘अनसोल्ड’ (बिना बिकी हुई) बताकर कस्टम एवं अन्य टेक्स से बचा लिया जाता है। ज्वैलरी शो में बेची जाने वाली किसी भी ‘आइटम’ का बिल किस फर्म का है। इस नाम की फर्म रजिस्ट्रर्ड भी है। ज्वैलरी का लाइसेंस या ज्वैलरी मिलावटी निकलने या स्टोन्स नकली निकलने पर ग्राहक कहाँ जाकर इस फर्म को ढ़ंूढेगा। बिल पर फर्म का नाम, फर्जी दुकान नम्बर, जौहरी बाजार, जयपुर के साथ ईमेल लिखा होता है। अब आप फर्जी दुकान नम्बर पर जौहरी बाजार में कहाँ जायेंगे।
ज्वैलरी शो में बेचे जाने वाले माल पर ‘हॉलमार्क’ का निशान 90 प्रतिशत पर नहीं होता है। विदेशी ग्राहक जिस माल को ज्वैलरी शो से खरीदकर ले जाता है उसको अपने देश में पाँच-दस साल बाद मिलावट या नकली स्टोन की शिकायत पर सब्र करने के अलावा कोई रास्ता नहीं होता है। विदेशी व्यापारी ज्वैलरी शो के स्टाल मालिक को ढ़ूंढने भी निकले और व्यापारी के खिलाफ कोई कार्यवाही भी करे, तो ऐसे व्यापारी एसोसिएशन की सदस्यता शुल्क इसीलिए देते हैं ताकि उनकी एसोसिएशन ऐसे मामलों में उनकी मदद कर सके या एसोसिएशन के नाम पर उन्हें धमकाया जा सके।
राजस्थान सरकार की जिम्मेदारी है कि ज्वैलरी शो में ‘हॉल मार्क’ स्टाल लगाकर शो में बेची जा रही ज्वैलरी की शुद्धता और गुणवत्ता की जाँच करें और जयपुर ज्वैलरी की ‘शाख’ को बनाये रखें। कस्टम चोरी से ज्वैलरी शो में लाई जाने वाली सैकड़ों किलो ज्वैलरी की जाँच के लिए एयरपोर्ट के साथ ज्वैलरी शो में भी कस्टम विभाग द्वारा विशेष दस्ता तैनात किया जाए। ज्वैलरी शो के समय देश-विदेश से होने वाले करोड़ों रूपये के हवाले की धरपकड़ के लिए डीआरआई एवं पुलिस दल संयुक्त दल बनाकर निगरानी कर कालेधन के आदान प्रदान को भी रोकें। आयकर विभाग एवं राजस्थान सरकार के सेल्स टेक्स, वेट एवं अन्य कर में ज्वैलर्स को दी गई ‘सेल्फ एसेस्मेंट’ छूट की निगरानी के लिए भी ज्वैलरी शो में विभाग द्वारा विशेष दस्ते नियुक्त कर सरकारी खजाने की आय को लूट से बचाने का प्रयास करना चाहिये।



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Friday, August 28, 2015

दिल्ली गये थे देश बदलने, ओटन लगे कपास!



अब्दुल सत्तार सिलावट            

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी आपने दिल्ली के लाल किले से दो बार देश में साम्प्रदायिकता रोकने और देश के विकास में सबको साथ लेने का नारा ज़रूर दिया, लेकिन इस नारे का अंज़ाम भी 27 अगस्त 2015 को गुजरात में भड़की हिंसा को रोकने के लिए आप द्वारा की गई अपील की तरह बेअसर ही रहा और जिस गुजरात का मुख्यमंत्री पद छोड़कर आप गुजरात मॉडल जैसा भारत बनाने दिल्ली की संसद में पहुंचे थे वहाँ जाकर आप विदेश यात्राएं, अपने राजनीतिक विरोधियों को घर बैठाने, छोटे-छोटे देशों से दोस्ती कर संयुक्त राष्ट्र में स्थाई सदस्यता का समर्थन जुटाने में लगे हैं। वहीं देश में नक्सलवाद, कश्मीरी अलगाववाद, पाकिस्तानी आंतकियों की घुसपैठ और अब आरक्षण की माँग पर आपके गुजरात को सेना के सुपुर्द करना पड़ा। आज सेना गुजरात में, कल महाराष्ट्र और परसों बिहार चुनाव में होगी तो फिर चीन और पाकिस्तान की सीमाएं कौन सम्भालेगा।
प्रधानमंत्री जी आप दिल्ली जाने के मकसद से भटक गये हैं। 'गये थे देश बचाने और ओटन लगे कपास' वाली कहावत को सिद्ध करने लग गये हैं। आप उस व्यापारी या उद्योगपति जैसे बन गये हैं जिसकी फैक्ट्री में मशीनें ज़ंग खा रही हो, उत्पादन बंद हो, मज़दूर हड़ताल पर हो, लेकिन फैक्ट्री मालिक मंडियों में दौड़ भाग कर अपना उत्पादन बेचने के लिए ऑर्डर बुकिंग करता हो। उसे इस बात की चिंता नहीं है कि फैक्ट्री बंद है, माल कहां से भेजेंगे। बस, वैसे ही आप दुनिया भर में भारत के योग, भारत की परमाणु और सैन्य शक्ति, विकास की योजनाओं का बखान कर विदेश में बसे भारतीयों से तालियां बजवा रहे हैं और घर में साम्प्रदायिकता, जातिवाद, नक्सलवाद, आतंकवाद का ज़हर बढ़ता जा रहा है।
आपकी पार्टी के अनुसार देश का सबसे काला अध्याय 'आपातकाल' में इंदिरा गांधी ने अख़बारों पर सेंसरशीप, अपने राजनीतिक विरोध की ख़बरों को रोकने के लिए लगाई थी, वैसे ही आज समय आ गया है कि देश के सोशल मीडिया और अख़बारों से अधिक सबसे तेज, सबसे पहले, ब्रेकिंग शगुफे पेश करने वाले इलेक्ट्रोनिक मीडिया की सीमाएं तय की जाये। आज टीवी न्यूज़ चैनलों पर एक व्यक्ति अपने दिल में भरा ज़हर मुसलमानों की घर वापसी, मुसलमान लड़कियों से शादी कर हिन्दू बना दो, मुस्लिमों की बढ़ती आबादी देश के हिन्दूओं के लिए ख़तरा जैसे साम्प्रदायिक ज़हर को बिना परिणाम सोचे देश को भ्रमित कर रहे हैं। इस ज़हर पर हिन्दू और मुसलमानों के बड़े धर्म गुरू, राजनेता, सांसद और जि़म्मेदार पदों पर बैठे लोग आग पर पानी डालने के बजाये टीवी चैनलों की अदालतों, सीधी बात, इन्टरव्यू में साम्प्रदायिकता पर पेट्रोल छिड़क रहे हैं। ऐसे ऐसे तर्क देते हैं कि सीधा साधा साफ दिल वाला भारतीय (हिन्दू और मुसलमान दोनों ही) भी इनके तर्क सुनकर भगवा और हरा रंग का चौला धारण कर साम्प्रदायिकता की बहस का सहभागी बन बैठता है।
टीवी चैनलों का दूसरा ताजा उदाहरण गुजरात आरक्षण आन्दोलन है जिसमें 25 अगस्त की रात अहमदाबाद में एक इलाके में छिटपुट झड़प हुई, लेकिन टीवी कवरेज की प्रतिक्रिया में पूरा गुजरात दूसरे दिन सिर्फ इसलिए जलना शुरू हो गया कि हार्दिक पटेल का बयान टीवी चैनलों पर दिखाया गया जिसमें हार्दिक पटेल ने कहा कि 'हमारे लोगों को पुलिस ने घरों में घुसकर मारा, गाडिय़ों के शीशे फोडे।' हालांकि यह बात सत्य थी लेकिन सभी टीवी चैनलों ने जिस प्राथमिकता से पुलिस बर्बता की कवरेज की, उसी का परिणाम सेना का फ्लैग मार्च और हार्दिक पटेल द्वारा पहले पुलिस बर्बरता में शामिल अधिकारी और कर्मचारियों को बर्खास्तगी की मांग और मज़बूत होकर गुजरात को शांत होने से रोक रही है।
साम्प्रदायिकता एवं आरक्षण आंदोलन की बेलगाम कवरेज के बाद टीवी पर चलने वाले विज्ञापनों पर भी एक नज़र डालें। कण्डोम के जो विज्ञापन पहले दूरदर्शन पर रात 11 बजे के बाद दिखाये जाते थे, उन विज्ञापनों को सुबह से शाम हर चैनल पर 15 से 30 मिनट के अन्तराल पर युवती को लगभग निर्वस्त्र समुद्र किनारे लहरों के पानी भीगोकर इन शब्दों के साथ दिखाया जा रहा है कि 'दिन भर करने का मन....'। अब ऐसे विज्ञापन जब आप दिन भर दिखाओगे तो फिर आबादी कंट्रोल पर चिंता और बहस करना तो छोडऩा ही होगा। एक विज्ञापन में बारात में घोड़े की नाल में जंग होने से घोड़ा 'हिनहिनाता' है और कम्पनी कहती है जंग निरोधक सीमेन्ट वाले घर में जंग की नो एंट्री। पिछले पाँच साल से जंग निरोधक सीमेन्ट का प्रचार शुरु हुआ है, जंग की सच्चाई तो ईश्वर जाने, लेकिन क्या इससे पहले बिना जंग निरोधक सीमेन्ट से बनी इमारतें अब गिर जाऐंगी।
प्रधानमंत्री जी, आप जिस राजनीतिक पार्टी से जुड़े हैं उसकी पहचान नैतिकता, देशभक्ति, हिन्दू रक्षा जैसे नारों से होती है। आपको गुजरात के मुख्यमंत्री से दिल्ली की संसद और प्रधानमंत्री तक पहुँचाने में देश के इलेक्ट्रोनिक और सोशल मीडिया की भागीदारी उल्लेखनीय एवं प्रसंसनीय है। लेकिन अब समय आ गया है कि मीडिया की कुछ मर्यादाएं, कुछ सीमाएं ज़रूर तय कर लेनी चाहिये अन्यथा बिहार चुनाव में मतदाताओं को भाजपा से जोडऩे के लिए टीवी चैनलों के लिए 'कण्डोम' का विज्ञापन बनाने वाली पीआर कम्पनीयां भाजपा के कमल को गुटखा, खैनी, माचिस, माथे की बिन्दिया के साथ कण्डोम के पैकेट पर भी कमल का निशान छापकर चुनाव प्रचार सामग्री की थैलीयों में नहीं डलवा देवें।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक हैं)

Friday, August 21, 2015

गांव के वार्ड की आबादी वाले देशों के आवभगत में भारत के प्रधानमंत्री


चौदह देशों का फिपिक सम्मेलन

गांव के वार्ड की आबादी वाले देशों के आवभगत में भारत के प्रधानमंत्री


 अब्दुल सत्तार सिलावट

राजस्थान की राजधानी गुलाबी नगरी में पिछले एक माह से 14 देशों की अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की फिपिक समिट की तैयारी चल रही थी। जयपुर विकास प्राधिकरण, नगर निगम, पर्यटन विभाग के साथ सुरक्षा में तैनात एक सौ से अधिक आईपीएस, आरपीएस एवं दो हजार से अधिक जवान। 30 किलोमीटर एयरपोर्ट से होटलों तक सभी विभागों के सिविल इंजीनियर, इलेक्ट्रीक एक्सईएन के साथ सीनियर अधिकारी तैनात।
14 देशों के राष्ट्राध्यक्षों के ठहरने के लिए प्रदेश की सर्वाधिक सुविधायुक्त होटल रामबाग पैलेस, जयमहल पैलेस और राजपूताना शेरेटन में ठहरने और मेहमानों के खाने का प्रबन्ध। एयरपोर्ट से होटलों तक सरकार ने सड़क के रिफ्लेक्टर से लेकर ग्रीनरी एवं फुटपाथ का रंगरोगन एकदम नया कर दिया। एक रात में जयपुर शहर का छोटे से छोटा और बड़े से बड़ा खड्डा भर दिया गया। शुक्रवार सुबह दिल्ली से मेहमान देशों के राष्ट्राध्यक्ष दो चार्टर प्लेन से सांगानेर के स्टेट हैंगर पर उतरे और उनका स्वागत हमारी मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे ने किया। राष्ट्राध्यक्षों की अगवानी, स्वागत, पधारो म्हारे देस के साथ स्वागत में रंगारंग कार्यक्रम का आयोजन मेहमानों के लिए किया गया।
राष्ट्राध्यक्षों की सुरक्षा के लिए त्रिस्तरीय सुरक्षा घेरा। सड़कों पर वर्दीधारी। होटल एवं समिट में कुछ वर्दीधारी बाकी सिविल में। जबरदस्त सुरक्षा। एक दिन पहले गुरुवार को एयरपोर्ट से होटलों तक मेहमानों को कैसे लायेंगे इसका पूर्वाभ्यास भी किया गया।
अब एक नजर चौदह देशों की भौगोलिक एवं सामाजिक स्थिती पर डालकर हमारी मेहमान नवाजी पर करोड़ों के खर्च एवं सरकार की दूर दृष्टी देख लेते हैं। चौदह देशों में एक देश 'निउव' की आबादी मात्र 1190 है इस देश की विशेषता फ्रि वाई फाई। जो भारत के लिए प्रेरणा देने वाला देश है! 1190 में से 50 व्यक्ति भारत में आज अपने देश के गवर्नर जनरल के साथ जयपुर घूम रहे हैं। दूसरा देश 'नौरु' इसका क्षेत्रफल 21 वर्ग किलोमीटर है। इस देश के राष्ट्रपति बारोन वाक्या के स्वागत में हमारे प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री, राजस्थान की मुख्यमंत्री 'पलक-पावड़े' बिछा रहे हैं! चौदह देशों में एक देश है 'टुवालु' क्षेत्रफल 26 वर्ग किलोमीटर देश की आय का साधन इन्टरनेट डोमियन नेम डॉट टीवी, वर्ष भर की आय 22 लाख डॉलर। एक देश है 'पालाउ' क्षेत्रफल 466.55 वर्ग किलोमीटर। इस देश के राष्ट्रपति टामनी रेमेंगगेशन ने सबसे पहले परमाणु हथियारों के स्टोर और इस्तेमाल के खिलाफ घोषणा की है इसलिए हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी इस देश से प्रभावित हो गये और सम्भवत: प्रेरणा भी ले सकते हैं। चौदह देशों में एक देश मार्शल आइलैण्ड क्षेत्रफल 181 वर्ग किलामीटर इनके साथ कुक आइलैण्ड क्षेत्रफल 240 वर्ग किलोमीटर। अब तीन देश टोंगा, माइक्रोनेशिया और किरिबाटी इन तीनों की समान आबादी एक लाख तीन हजार से पांच हजार तक की है।
चौदह देशों के विशाल समिट में मात्र दो देश फिजी (आबादी 8.58 लाख) और पोपिया न्यू जिनी (70.59 लाख) बड़े देश है जबकि बाकी बारह देशों की आबादी और क्षेत्रफल से दस गुना बड़ा क्षेत्रफल और आबादी अजमेर नगर निगम की है। जहाँ मेयर के चुनाव के लिए भाजपा के पार्षदों में दो धड़े बनकर एक बागी प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। इसी प्रकार राजस्थान के कई नगर परिषदों एवं पालिकाओं में भी सत्ता दल भाजपा के पार्षदों में गुटबाजी के कारण चेयरमेन पद निर्दलीयों और कांग्रेस की झोली में जा रहे हैं, लेकिन भाजपा सरकार की मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे इतने 'बड़े-बड़े' देशों के राष्ट्राध्यक्षों की अगवानी में व्यस्त हैं इसलिए भाजपा के अन्दरूनी झगड़े में हस्तक्षेप भी नहीं कर पा रही है। जबकि सच्चाई यह है कि अजमेर नगर निगम की बगावत में वसुन्धरा राजे हस्तक्षेप कर दें तो यह सीट बच सकती है, ऐसा ही राजस्थान की कई नगर परिषदों और पालिकाओं में भी भाजपा का बोर्ड बनाने के लिए मुख्यमंत्री स्वयं या इनके नाम से एक फोन की आवश्यकता है जो भाजपा के बागीयों या निर्दलीयों को भाजपा के बोर्ड बनाने में मदद दिलवा सकते हैं। खैर, मुख्यमंत्री चौदह देशों के राष्ट्राध्यक्षों की 'आव-भगत' में व्यस्त हैं। पालिका चुनाव तो आते-जाते रहते हैं। इतने बड़े-बड़े देशों के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री गवर्नर जनरल की आव-भगत का मौका बार-बार थोड़े ही मिलता है!
हमारे प्रधानमंत्री नेरन्द्र मोदी के विदेश दौरों के बाद तथा हमारे देश की विदेश नीति के चाणक्यों की दूर दृष्टी और देश की अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति के बारे में हमारे बढ़ते कदमों की पहचान आज राजस्थान में हो रहे चौदह देशों की अन्तर्राष्ट्रीय समिट से ही लगा सकते हैं। इन देशों से हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आर्थिक समझौतों की फाइलों पर दस्तखत कर राष्ट्राध्यक्षों के साथ 'आदान-प्रदान' करते फोटो भी खिचवाऐंगे? क्या इन देशों में हमारे उद्योगपति निर्यात कर गिरते रूपये का स्तर सुधार लेंगे? फिपिक सम्मेलन में आये चौदह देश यदि भारत की पाकिस्तान या चीन से ईश्वर नहीं करे, कभी युद्ध हो जाये तो क्या यह देश अपनी सेना, इन देशों के लड़ाकू विमान या थल सेना और पनडुब्बीयां भेजकर हमारे देश की मदद करने की स्थिती में हैं? क्या भारत के स्पेस सेन्टर श्री हरिकोटा से इन देशों के रॉकेट छोड़कर भारत को आर्थिक लाभ हो सकता है या हम इन्हें अपने देश से आलू, प्याज, गेहूँ, काली मिर्च भेजकर विदेश व्यापार से मुद्रा को मजबूत कर सकेंगे?
चौदह देशों की फिपिक समिट की कवरेज कर रहे एक टीवी चैनल की न्यूज एंकर ने जयपुर में खड़े अपने रिपोर्टर से जब इस समिट का लाभ पूछा तब इन देशों के क्षेत्रफल और आबादी से अनभिज्ञ रिपोर्टर का जवाब आश्चर्य चकित करने वाला था। रिपोर्टर ने कहा 'प्रधानमंत्री मोदी की दूर दृष्टी और भाजपा की नई सरकार की विदेश नीति का परिणाम है यह विशाल अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन। शाम को विदेश व्यापार के बहुत से समझौते प्रधामंत्री मोदी की उपस्थिती में होंगे। रिपोर्टर आगे कहता है कि चौदह देशों के सम्मेलन से चीन जैसे देश का बढ़ता वर्चस्व इस क्षेत्र में खत्म हो जायेगा।' अब आप ही अंदाज लगाऐं कि हजार बारह सौ की आबादी और 21 वर्ग किलामीटर क्षेत्रफल वाले एक दर्जन देशों के लिए हमारे एक वार्ड की राशन की दुकान ही बहुत है। ऐसे देशों को हम क्या तो बेचेंगे और इनके साथ खड़े होने से चीन को क्या फर्क पड़ेगा?

यह लेख फिपिक सम्मेलन की आलोचना या इसकी उपयोगिता पर प्रश्न चिन्ह लगाने के लिए नहीं है, बल्कि भारत जैसे 130 करोड़ के देश के नये राजनेता सैकड़ों करोड़ रूपये और दो दिन तक केन्द्रीय एवं राजस्थान सरकार की पूरी मशीनरी को चौदह देशों के मेहमानों के आवभगत में 'पलक पावड़े' बिछाकर किस दिन की तैयारी कर रहे हैं। हमें इन देशों से किस चीज की उम्मीद रखनी चाहिए और हमारे राजनेताओं को इन देशों को गले लगाने के पीछे कौन सा छुपा रहस्य दिखाई दे रहा है? इस पर आप भी विचार करें।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक हैं)