Sunday, July 10, 2016

बदले-बदले मेरे ‘सरकार’ नज़र आते हैं...


बदले-बदले मेरे ‘सरकार’ नज़र आते हैं...

अब्दुल सत्तार सिलावट

पाली सांसद पी.पी. चौधरी केन्द्रीय मंत्री बनने से पहले पाली में अपनी पसंद का यूआईटी चेयरमैन बनाने, प्रदुषण समस्या निपटाने में अपने समर्थकों को प्राथमिकता देते तथा ‘अपने लोगों’ को पुलिस की अच्छी पोस्टिंग, अध्यापकों के तबादलों, पटवारी-तहसीलदारों को अपने जनप्रतिनिधियों की मांग पर बाहर जिलों से लाने के सिफारिशी पत्रों पर हस्ताक्षर करते दिखाई देते थे, लेकिन मंत्री पद की शपथ के बाद अपने लोकसभा क्षेत्र के पहले दौरे में ही राष्ट्रीय स्तर की कानून पालिसी और इलेक्ट्रोनिक जनसंचार की क्रांति लाने की योजनाओं को देश भर में लागू करने की बातों से स्वागत सभाओं में जनता ही नहीं मंच पर बैठे भाजपा नेताओं को भी अपने सांसद के मंत्री बनते ही बदले-बदले से ‘सरकार’ नज़र आने लगे हैं।


मारवाड़ी में कहावत है कि ‘घर का जोगी जोगड़ा, बाहर गांव का संत’, इस कहावत को चरितार्थ किया पाली के लोकप्रिय सांसद पी.पी. चौधरी ने मंत्री पद की शपथ लेते ही। अब तक हम केन्द्र की मोदी सरकार के अरुण जेटली, वैंकेया नायडू और रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन को ही भारत के भाग्य विधाताओं की नजर से देखते थे, लेकिन सांसद पी.पी. चौधरी के मंत्री बनने के बाद पाली के पहले दौरे में पहले दिन की स्वागत सभाओं की थकावट के बीच पत्रकारों के साथ पत्रकार वार्ता की औपचारिकता से दूर सांसद के दो साल के सफर से राष्ट्रपति भवन के अशोक हॉल में मंत्री पद की शपथ लेने तक के सफर का बिना ‘लाग-लपेट’ के आत्मीयता से किये विश्लेषण के साथ अपने दोनों मंत्रालय कानून और इलेक्ट्रोनिक एवं आईटी की भावी योजनाओं का जो चित्रण पेश किया उससे पहली बार लगा कि ग्रामीण परिवेश में किसान के घर पले और लाखों वकीलों की भीड़ से निकलकर राजनीति में प्रवेश कर पहली बार सांसद पी.पी. चौधरी की ‘सोच’ देश के विकास में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा अपनी टीम में शामिल करने का निर्णय, सब कुछ पी.पी. साहब की प्रतिभा का ‘सेल्फ इंट्रोडक्शन’ करवाते हैं।
भाजपा की केन्द्र सरकार में नरेन्द्र मोदी का पिछले दो साल में गुजरात प्रेम ही नजर आ रहा था। गुजरात कैडर के अधिकारी प्रधानमंत्री कार्यालय की कमान सम्भाले, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, गुजरात विधानसभा के चुनावों में मोदी के चाणक्य ओम माथुर, बिहार-यूपी चुनाव की बागडोर में अग्रणी। लेकिन पहली बार मंत्रिमण्डल विस्तार में लगा कि 19 चेहरों का चयन ईमानदार, सेवा का समर्पण, उच्च शिक्षा के साथ अपने मंत्रालय के प्रति राष्ट्रीय स्तर की सोच के धनी भी हैं।
केन्द्रीय मंत्री पी.पी. चौधरी का पहला मंत्रालय कानून इनके पेशे से जुड़ा है तथा अब तक नरेन्द्र मोदी की नजदीकियों का मुख्य स्रोत कानूनी पेचिदकीयों में सफलता वाले सुझाव और कानूनविद होने के नाते ही भारतीय संसद का अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आपने प्रतिनिधित्व भी किया, लेकिन इलेक्ट्रोनिक एवं आईटी जैसा मंत्रालय जिसमें पी.पी. चौधरी के मोबाइल पर इंटरनेट और वाट्सएप भी निजी सचिव संभालते हैं ऐसे मंत्रालय के बारे में शपथ लेने के चार दिन बाद पत्रकारों को देश के ग्रामीण परिवेश को आधुनिक एवं नवीन संचार तकनीक से जोड़ने की भावी योजनाएं सिर्फ प्रभावित ही नहीं बल्कि आश्चर्यचकित करने वाली थी।
कल तक जवाई पुनर्भरण, पाली की प्रदुषण, सिवरेज और पेयजल की समस्याओं पर केन्द्र से मदद की बातें करने वाले नवनियुक्त केन्द्रीय मंत्री पी.पी. चौधरी के इलेक्ट्रोनिक एवं आईटी मंत्रालय की भावी योजनाओं पर सरकारी अधिकारियों के आंकड़ेबाजी वाले बयानों से दूर एकदम सरल भाषा में ग्रामीणों के लिए कॉमन सर्विस सेन्टर (सीएससी) तथा शहरों में वाईफाई की योजनाओं से पाली के सांसद सिर्फ राष्ट्रीय ही नहीं अंतर्राष्ट्रीय स्तर की सोच के धनी दिखाई दिये।

...‘अपणायत’ की सलाह

केन्द्रीय मंत्री पी.पी. चौधरी के शुभचिन्तकों की ‘अपणायत’ भरी सलाह है कि अब आप पाली के विधायकों, मंडल अध्यक्षों, राजनीतिक नियुक्तियों और छोटे-बड़े विवादों से पल्ला झाड़ कर ‘सर्वजन हिताय-सर्वजन सुखाय’ नीति पर सभी विधानसभा क्षेत्रों के विकास को प्राथमिकता देकर अब तक दूर रहे नेताओं को भी गले लगा लें।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आपकी काबिलियत को सम्मान देकर दो-दो महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी सौंपी है। आपके शुभचिन्तक चाहते हैं कि आप पाली की ‘पंचायती’ से तटस्थ होकर देश सेवा के साथ पाली लोकसभा क्षेत्र के सर्वांगीण विकास में बिना भेदभाव के केन्द्र का धन सभी विधानसभा क्षेत्रों में लगाऐं और पाली लोकसभा क्षेत्र की जनता, विधायकों और जनप्रतिनिधियों को बाध्य कर देवें कि 2019 के लोकसभा चुनावों में आप बिना एक भी मीटिंग लिये या बिना गांवों के दौरे किये दिल्ली में बैठकर पाली लोकसभा क्षेत्र से निर्विरोध या ऐतिहासिक मतों से चुनाव जीत कर दोबारा लोकसभा में प्रवेश कर अगली सरकार में केबिनेट मंत्री की शपथ लेकर पाली लोकसभा क्षेत्र को गौरवान्वित होने का मौका देवें।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक हैं)

Tuesday, July 5, 2016

चुनाव यूपी में : मंत्रियों की सौगात राजस्थान को


चुनाव यूपी में : मंत्रियों की सौगात राजस्थान को

अब्दुल सत्तार सिलावट

भारतीय जनता पार्टी की मोदी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में राजस्थान से चार नये मंत्री लिये गये हैं जबकि यूपी चुनाव की तैयारी के बावजूद उत्तर प्रदेश से मात्र तीन मंत्रियों को ही मोदी जी ने अपनी टीम में शामिल किया है।
सोमवार की रात तक 18 मंत्रियों की लिस्ट में 19वां नाम नागौर सांसद सी.आर. चौधरी का जोड़कर मोदी जी ने एक ही समाज के दो मंत्री लेकर देश को संदेश दिया है कि सरकार में जनसेवा और काबिलियत को प्राथमिकता दी जा रही है। जातियों और क्षेत्रियता का कांग्रेसी ‘स्टाईल’ में समीकरण नहीं बनाया जा रहा है।
मंत्रियों के ‘प्रमोशन’ में प्रकाश जावड़ेकर ने बाजी मारी, वहीं पहली बार सांसद बने पाली के पी.पी. चौधरी ने मात्र दो साल में साबित कर दिया कि छोटे से गांव भावी (जोधपुर, राजस्थान) से वाया जोधपुर-पाली अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय संसद का प्रतिनिधित्व करने वाले व्यक्तित्व में देश के विकास को नई दिशा देने का ‘विजन’ है। इसी ‘तड़प’ को देखकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पाली के सांसद पी.पी. चौधरी को मंत्रिमंडल में शामिल किया है।
आजादी के बाद पाली लोकसभा क्षेत्र से कुशल राजनीतिज्ञ मूलचन्द डागा, विधिवेता गुमानमल भंसाली, उद्योगपति सुरेन्द्र कुमार तापड़िया, इंदिरा गांधी के खिलाफ आपातकाल में फिल्म निर्माता (किस्सा कुर्सी का) अमृत नाहटा जैसे सांसद तो मिले, लेकिन राष्ट्रपति भवन के अशोक हॉल में शपथ वाले माईक पर किसी का नाम नहीं पुकारा गया और इस परम्परा को 5 जुलाई 2016 को 11ः36 बजे संसद के गलियारों से लेकर नरेन्द्र मोदी, अमित शाह टीम में अपनी योग्यता का परचम फहरा चुके पाली सांसद पी.पी. चौधरी ने ‘ईश्वर के नाम शपथ लेकर’ नया अध्याय जोड़ा है।
जाट आरक्षण की आग में झुलस रहे हरियाणा के साथ भरतपुर में जाट आरक्षण आन्दोलन का नया परचम फहराया गया। जाटों में आनन्दपाल की गिरफ्तारी और हाल में बाड़मेर में पुलिस फायरिंग में हत्या के बाद जाट-राजपूतों में सोशल मीडिया पर ‘टिप्पणी स्पर्धा’ को भी दो ‘चौधरी, जाट, सीरवी, पटेल, पीटल’ समाज के केन्द्र सरकार में मंत्री बनने से शांति और आपसी सौहार्द का वातावरण बनाने में मानसिक संतुष्टि के साथ सरकार को सहयोग भी मिलेगा।
भाजपा की नरेन्द्र मोदी सरकार और भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का राजस्थान की ओर विशेष आकर्षण का एक कारण यह भी है कि देश में पहला प्रदेश राजस्थान है जहाँ पूरे 25 सांसद और सभी 12 राज्यसभा सदस्य भारतीय जनता पार्टी के हैं। राजस्थान इतना बड़ा प्रदेश होने के बावजूद भी भाजपा काबिज है जबकि अन्य उत्तर भारत के मध्य प्रदेश, यूपी, बिहार, एवं स्वयं प्रधानमंत्री का प्रदेश गुजरात भी इन आंकड़ों से दूर है।

राजस्थान, एमपी सरकारें मोदी ‘गुड बुक्स’ में नहीं 
राष्ट्रपति भवन के अशोक हॉल में जब राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंत्री शपथ ले रहे थे तब राष्ट्रीय टीवी न्यूज़ चैनल शपथ ग्रहण का सीधा प्रसारण दिखाने के साथ जो टिप्पणियां कर रहे थे उनमें राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंत्रियों को वहां की सरकारों के मुख्यमंत्री खैमे से दूर बताया जा रहा था।
टीवी न्यूज़ चैनलों में सरकारों पर ‘सटीक’ टिप्पणी करने के लिए प्रतिष्ठित एवं लोकप्रिय न्यूज़ चैनल ने राजस्थान के नये मंत्रियों को मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे के विरोधी टीम के नाम से टिप्पणी कर कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने राजस्थान और मध्य प्रदेश की मौजूदा सरकारों को सीधा ‘मैसेज’ दिया है।

‘लेफ्ट हैंड’ पी.पी. चौधरी
भारतीय वास्तु एवं दुनिया के समझदार लोगों में माना जाता है कि ‘लेफ्ट हैंड’ से लिखने-पढ़ने वाले लोग विशेष प्रतिभा के धनी होते हैं। अमेरिका के सफल राष्ट्रपति बिल क्लिंटन, निक्सन, कैनेडी और मौजूदा राष्ट्रपति ओबामा भी लेफ्ट हैंड हैं। सऊदी अरब के शेख सुल्तान, दुबई शेख मोहम्मद एवं अब हमारे नये मंत्री पी.पी. चौधरी भी लेफ्ट हैंड हैं। राष्ट्रपति भवन में शपथ के बाद रजिस्टर में दस्तखत लेफ्ट हैंड से किये हैं।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक हैं)

Friday, July 1, 2016

सालोदिया की टोपीः मीणा की ताजपोशी में सहायक



सालोदिया की टोपीः मीणा की ताजपोशी में सहायक

अब्दुल सत्तार सिलावट

राजस्थान में पिछले एक दशक में कई बार ऐसे अवसर देखने को मिले जब मंत्रिमण्डल विस्तार की खबरों के चलते कई वरिष्ठ विधायक स्वयं का नम्बर लगने की तैयारी में नया बंद गले का सूट और सूट के साथ शपथ ग्रहण समारोह के समय सर पर राठौड़ी, मेवाड़ी, हाड़ौती के साफे अपनी निजी कार की डिक्की में बंधवाकर तैयार रखते देखे गये थे, लेकिन इस बार ‘ब्यूरोक्रेट्स’ मुख्य सचिव की ताजपोशी में 29 जून की रात से 30 जून की दोपहर तक बधाईयों की फोन लिस्ट में हर दो-चार घंटे में नाम बदलते रहे और अंत में अप्रत्याशित नाम पर ‘ताजपोशी’ की रस्म अदायगी कर मुख्य सचिव की दौड़ से दूर ओ.पी. मीणा को राजस्थान का ‘सरताज’ स्वीकार कर लिया गया।
आजादी के बाद पहली बार एसटी वर्ग को राजस्थान का मुख्य सचिव बनाकर जो संदेश सरकार दे रही है इसकी नींव में पूर्व आईएएस उमराव सालोदिया ने आहुति दी है और भले ही सालोदिया सफल नहीं हुए लेकिन उनकी टोपी आज ओ.पी. मीणा की ताजपोशी में अहम भूमिका निभा गई। अब तक सचिवालय के प्रमुख शासन सचिव पदों से दूर निदेशक, आयुक्त, राजस्व मंडल में सेवा दे रहे ‘वर्ग’ के अधिकारियों में आत्मविश्वास पैदा हो गया है कि ‘अगर सच्चे मन से पत्थर उछालेंगे तो आसमान में भी छेद कर सकते हैं’ और ऐसा कर दिखाया जनपथ के हाऊसिंग बोर्ड भवन से सचिवालय के मुख्य सचिव तक पहुंचकर ओ.पी. मीणा ने इस मुहावरे को सच कर दिया।
मुख्य सचिव पद पर ओ.पी. मीणा के पहुंचने पर राजस्थान में अनुसूचित और जनजाति के उच्च पदों पर बैठे विशिष्ठजनों को भी याद किया गया जिसमें राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल, आरपीएससी के ललित के. पंवार, राज्य निर्वाचन आयोग के राम लुभाया के साथ ही हाल के राज्यसभा चुनावों में राजकुमार वर्मा को अनुसूचित कोटे से सांसद बनाकर राज्यसभा में भेजा गया है।
मुख्य सचिव ओ.पी. मीणा की ताजपोशी के कुछ घंटों बाद ही प्रदेश के प्रशासनिक अधिकारियों के तबादलों में लगभग दो दर्जन आईएएस एवं चार दर्जन से अधिक पुलिस अधिकारियों का फेरबदल कर राजस्थान के विकास को नई गति देने का संकेत दिया है। मुख्य सचिव की दौड़ से बाहर हो गये वरिष्ठ अधिकारियों को भी ‘अच्छी’ पोस्टों से हटाकर ‘और अधिक अच्छी’ पोस्टों पर नियुक्ति दी गई तथा पिछले कुछ समय से भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ अभियान चला रहे पुलिस अधिकारियों को भी तत्काल फेरबदल की सूचि में नई पोस्टों पर तैनात कर मुख्य सचिव ने राजस्थान में विकास की नई गति के संकेत दिये हैं।

दिल्ली के नजीब जंग को याद किया

कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने मुख्य सचिव की नियुक्ति को दिल्ली सरकार और नजीब जंग की ‘जंग’ की स्थिती से तुलना करते हुए कहा कि ऐसी स्थिती भी राजस्थान में पैदा हो सकती है। जबकि ओ.पी. मीणा की नियुक्ति में मौजूदा सरकार की मुख्यमंत्री से लेकर वरिष्ठ मंत्रियों तक में अब तक कोई विरोध नजर नहीं आया है। मुख्य सचिव की दौड़ में शामिल अधिकारियों की नाराजगी भी स्थाई नहीं होती है। थोड़े दिनों में सब कुछ ‘नॉर्मल’ हो जाता है।

फाइलों का ‘मार्ग बदलेगा’?

मुख्य सचिव की दौड़ में लगे अधिकारियों की काबिलियत पर टिप्पणी में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा था कि अधिकारी सभी भले हैं कोई भी मुख्य सचिव बन जाये, लेकिन सरकार की कार्यप्रणाली में कोई बदलाव की उम्मीद नहीं है।
पूर्व मुख्यमंत्री का संकेत है कि मुख्य सचिव तो केवल ‘पद’ है असली सरकार और आदेश तो ‘सीएमओ’ से ही चलते हैं। उनका अभिप्राय था कि नये मुख्य सचिव बनने के बाद सचिवालय की फाइलों का ‘मार्ग’ बदलकर पहले मुख्य सचिव कार्यालय जायेगी या परम्परानुसार सीएमओ से ही फैसले होंगे।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक हैं)